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परिचय

बच्चों के सीखने के स्थल में वर्गकक्ष का एक अहम स्थान है। वर्ग कक्ष में होने वाली गतिविधियाँ बच्चों को सीखने में मददगार होती है। वर्गकक्ष का बेहतर संचालन करना शिक्षक की अहम जिम्मेवारियों में शामिल है। ऐसे वातावरण का निर्माण करना ताकि सभी बच्चे सहज महसूस करें। सीखने की गतिविधियों में शामिल हों। शिक्षक अपने वर्गकक्ष की योजना के निर्माण में किन किन अवयवों का ध्यान रखते हैं, बातावरण का निर्माण उसपर निर्भर करता है।

वर्गकक्ष में मूलतः तीन घटक उपस्थित होते है। शिक्षक,छात्र एवं पाठयचर्या पठन सामग्री। इन तीनों का बेहतर समन्वय ही वर्गकक्ष प्रबंधन का आधार है। शिक्षक और छात्र के बीच घटित होने वाली अंतःक्रिया और इसके दौरान संप्रेषित होने वाली पाठयचर्या को ही वर्गसंचालन कहा जा सकता है। इस क्रिया को बेहतर करने हेतु अपनाई जानेवाली गतिविधयाँ योजना तैयार कर क्रियान्वयन करना ही वर्गकक्ष प्रबंधन कहा जाता है।

प्रारभिक कक्षाओं में जहाँ बच्चे विभिन्न समुदाय,समाज,संस्कृति,धर्म, जाति और परम्परा से आते है। इन सभी बच्चों को एक वर्गकक्ष में पाठयचर्या के अनुरूप सीखने में शामिल करना शिक्षक के लिए एक चुनौतीपूर्ण कार्य होता है। बच्चे स्वभाव से चंचल एवं जिज्ञासु होते है। सभी बच्चों को वर्गकक्ष की गतिविधयों में समान रूप से भगीदार बनाना होता है। शिक्षक को गतिविधियों का संयोजन इस प्रकार से करना होता है कि सभी बच्चे रूचि लें। ऐसी योजना बनाने हेतु शिक्षक को कई मूल भूत बातों पर ध्यान देना होता है।

प्रस्तुत पाठयक्रम शिक्षको के लिए तैयार की गई है। यह पाठयक्रम व्दसपदम अर्थात अपनी इच्छा एवं समय से पूरा कर पाएगें। पाठयक्रम पूरा करने के बाद शिक्षक वर्गकक्ष प्रबंधन के विभन्न घटकों को समझ पाऐंगें एवं वर्गकक्ष विनिमयन के दौरान उपयोग कर पाऐंगे,उन घटकों का ध्यान रख पाऐंगें।

औचित्य

वर्गकक्ष के तीन घटक है। शिक्षक,छात्र एवं पाठयचर्या। शिक्षक की अपनी धारणा होती है। छात्र विभिन्न परिवेश से अपने  विशिष्ट अनुभवों के साथ वर्गकक्ष में होते है। पाठयचर्या का अपना एक उद्देश्य होता है। शिक्षक को इन घटकों में सामंजस्य स्थापित करने की रणनीति बनानी होती है जिससे सभी बच्चों के सीखने के अपेक्षित परिणाम प्राप्त हो सके। कक्षा में सकारात्मक और सीखने के अनुकूल वातावरण बनाने के लिए ,रणनीतियों को लागू करने में शिक्षक की भूमिका महत्वपूर्ण होता है। कक्षा प्रबंधन उन गतिविधियों का एक समूह है जो बच्चें की विविधता,गरिमा और सीखने का आदर करता है। शिक्षक को कक्षा प्रबंधन की बेहतरी हेतु इन घटकों पर घ्यान रखना चाहिए। यह पाठयक्रम शिक्षकों को इन घटकों को समझने में मदद करेगी।

कोर्स का उद्देश्य

यह कोर्स वर्गकक्ष को प्रभावित करने वाले सभी कारकों पर बात करती है । इन कारको की समझ शिक्षकों को वर्गकक्ष के बेहतर प्रबंधन करने में मदद कर सकती है। इस कोर्स से शिक्षकों को

1     बच्चों के विविधता को समझ पाऐंगें ।

2          बच्चों के सीखने में बाधक कारकों की पहचान कर पाऐंगें।

3     बच्चों के सिखाने के तरीकों पर स्वयं चिन्तन कर पाऐंगें।

कोर्स के अधिगम

शिक्षक द्वारा यह कोर्स पूरा करने के पर अपेक्षा की जाती है कि

1     बच्चो के विविधता को महसूस एवं आदर कर पाऐंगें एवं तदनुरूप वर्गकक्ष की गतिविधियों को संचालित कर पाऐंगें।

2     बच्चों के व्यक्तिगत आवश्यकता , उनके पूर्व अनुभव एवं सीखने की गति के आधार पर गतिविधि तैयार कर बच्चों को सीखने में मदद कर पाऐंगें।

3     वर्गकक्ष में सीखने के वातावरण विभिन्न घटकों को ध्यान में रखकर तैयार कर पाऐंगें।

वर्ग कक्ष का प्रबंधन क्यों ?

बच्चों के सीखने के एक महत्वपूर्ण स्थल वर्गकक्ष है। शिक्षक वर्ग कक्ष के संचालन में कई तरीेके अपनाते है। पर ऐसा देखा जाता है कि सभी बच्चे वर्ग कक्ष की गतिविधियों में समान रूप से भागीदार नहीं बन पाते। कई अपने साथियों के साथ चर्चा में रहते है कई बार बार बाहर जाने का बहाना ढूंढते रहते है। शिक्षक वर्ग कक्ष को नियंत्रित करने हेतु डंड या प्रलोभन का सहारा लेते है। क्या यह उचित है। अगर नही ंतो फिर वर्गकक्ष के सभी बच्चों को सीखने की गतिविधि में शामिल कैसे किया जाए। शिक्षक के लिए एक चुनौती होता है। वर्गकक्ष का प्रबंधन एक कौशल है। वर्ग कक्ष का वातावरण जबतक सभी बच्चों के लिए अनुकूल न हो सीखने की गतिविधि में सभी बच्चों को शामिल करना एक चुनौती बना रहता हैं। वर्ग कक्ष में मूलतः तीन घटक उपस्थित होते है। बच्चे, शिक्षक एवं पाठयवस्तु। इन तीनों घटकों का समन्वय वर्गकक्ष का मूल आधार है। शिक्षक इन तीनो में समन्वय स्थापित करने हेतु जिम्मेवार हैं। शिक्षक द्वारा प्रभावशाली शिक्षण अधिगम प्रक्रिया से वर्ग कक्ष का अनुकूल वातावरण का निर्माण किया जाता है और बच्चों का ध्यान भी पाठयवस्तु की ओर आकर्षित होता है। शिक्षक का यह प्रयास ही वर्गकक्ष प्रबंधन की कुंजी है। अतएव वर्गकक्ष प्रबंधन में शिक्षक का व्यवहार, शिक्षण अधिगम प्रक्रिया को बेहतर बनाता हैं। बच्चों के बेहतर सीखने के लिए शिक्षक को बेहतर वर्गकक्ष प्रबंधन की तकनीक सीखना आवश्यक होता है।

वर्ग कक्ष प्रबंधन कैसे ?

वर्ग कक्ष में शिक्षक और बच्चों के बीच पाठयवस्तु के साथ  अन्तःक्रिया होती है। अन्तःक्रिया के निहित उद्देश्य होते है। शिक्षक उद्देश्य के आधार पर गतिविधि और चर्चा बच्चों के साथ करते है। चर्चा संयोजित करने हेतु शिक्षक को वर्गकक्ष के घटकों पर पूरी समझ रखनी होती है। बच्चों के परिवेश,पूर्व ज्ञान,रूचि ,के अनुरूप पाठयवस्तु के उद्देश्य की प्राप्ति के लिए गतिविधि तैयार करना पड़ता है। शिक्षक इन बातों को ध्यान में रखकर योजना का निर्माण करते है तो वर्गकक्ष प्रबंधन में मदद मिलती है। बच्चों की गरिमा का आदर करना ,उनकी विविधता का सम्मान करना वर्गकक्ष में अनुकूल वातावरण तैयार करती है। किसी भी बच्चों के साथ भेदभाव वर्गकक्ष प्रबंधन में चुनौती उत्पन्न कर सकती है। बच्चों के सीखने की गति एवं तरीके भिन्न भिन्न होते है। सभी बच्चों की सीखने की सम्यक जानकारी शिक्षक के पास होना कुशल प्रबंधन कौशल को दर्शाता है। अतएव कुशल वर्गकक्ष प्रबंधन हेतु शिक्षक को बच्चों के गरिमा , विविधता एवं सीखने तरीके को ध्यान में रखकर  वर्ग कक्ष में बच्चों के साथ  अन्तःक्रिया करनी होती है।

 

 

 

 

 

 

 

प्रस्तावित दिनों की संख्याः pkj lIrkg

पाठ्यक्रम

सप्ताह 1

प्रभावी कक्षा-कक्ष के मूल घटकों को चिन्हित करना एवं संभावनाओं को तय करना

प्रभावी कक्षा-कक्ष के मूल घटक                     

प्रभावी कक्षा-कक्ष के घटकों की व्यापक समझ         

नीतियाँ और संभावनाएँ                            

समस्याओं से मुक्ति

सप्ताह 2

प्रभावी कक्षा-कक्ष हेतु चिन्हित घटकों के सूचक तैयार करना

शिक्षक-बच्चों का संबंधः-कुछ सूचक                 

बच्चे-बच्चे का संबंधः-कुछ सूचक                   

शिक्षक-प्रधानाध्यापक का संबंधः-कुछ सूचक           

शिक्षक-समुदाय का संबंधः-कुछ सूचक

सप्ताह 3

 प्रभावी कक्षा-कक्ष हेतु चिन्हित घटकों के सूचक तैयार करना

अकादमिक संस्थाओं (CRC,BRC,DIET)से संबंधः-कुछ सूचक

 शिक्षक की अपनी तैयारीः-कुछ सूचक               

 कक्षा-कक्ष में बच्चों के सीखने के तरीको मेंः-कुछ सूचक

शिक्षण में पिछड़े बच्चों को कक्षा कक्ष की गतिविधिः-कुछ सूचक

सप्ताह 4

प्रभावी कक्षा-कक्ष हेतु चिन्हित घटकों के सूचक तैयार करना एवं अपने विद्यालय के लिए योजना बनाना

कक्षा में पाठयपुस्तकः-कुछ सूचक                   

मूल्यांकन विधियाँंः-कुछ सूचक                   

एक प्रभावी कक्षा के कुछ सूचक                    

मेरी कक्षा प्रभावी बनेगी ऐसे

                    

प्रत्येक सप्ताह में मुख्य बातें

·         उद्देश्यः प्रत्येक सप्ताह के उद्देश्य को स्पष्ट रुप से बताते हैं।

·         अपेक्षित प्रतिफलः सप्ताह की समाप्ति के उपरांत प्रतिभागियो से क्या अपेक्षाएँ हैं?

·         गतिविधिः अभ्यास करने एवं लागू करने के लिए एकल एवं समूह में की जाने वाली गतिविधियाँ।

·         असाइन्मेंटः प्रत्येक सप्ताह की समाप्ति में सीखी गयी बातों के आकलन हेतु असाईनमेंट से की जाती है।

 

प्रभाव का मूल्यांकन

प्रतिभागियों की वर्तमान जानकारी को समझने के लिए प्रशिक्षण से पहले एक प्रशिक्षण पूर्व आकलन फॉर्म भरवाया जाएगा। प्रशिक्षण के अंत में एक प्रशिक्षण पश्चात् फॉर्म भी भरवाया जाएगा। दोनों आकलनों के अंतर का विश्लेषण किया जाएगा। प्रशिक्षण पश्चात् आकलन के प्रतिफल का उपयोग आगामी प्रशिक्षण की योजना बनाने में किया जाएगा ताकि कमियों को लगातार दूर किया जा सके।


वर्ल्ड बैंक द्वारा संपोषित शिक्षक इफेक्टिवनेस इन बिहार ऑपरेशन परियोजना के अंतर्गत इम्प्लिमेंटेशन सपोर्ट एजेंसी द्वारा राज्य शैक्षिक शोध एवं प्रशिक्षण परिषद् के साथ मिल कर विद्यालयों को सक्रिय बनाने के लिए 10 मोडयुल का निर्माण किया गया है | इस क्रम में विषयों से जुड़े कौशल के विकास को ध्यान में रख कर  यह प्रशिक्षण मोडयुल तैयार किया गया है |  विषयों की प्रकृति की एवं उसकी अपेक्षाओं की समझ विद्यालय में परिवर्तन के लिए इंजन की तरह काम कारेगा |

इस प्रशिक्षण का डिजाईन निम्नलिखित डॉक्यूमेंट के आधार पर किया गया है

शिक्षक की आवश्यकता का मूल्यांकन   

शिक्षक के परफॉरमेंस असेसमेंट (शबनम सिन्हा, रुक्मिणी बनर्जी एवं विल्मा वाधवा ) के दस्तावेज ने शिक्षकों के साथ तीन क्षेत्र पर काम करने की आवश्यकता बताई है

·         शिक्षकों का विषय की समझ,

·         शिक्षको के द्वारा किये जाने वर्ग कक्षा में किये जाने वाले कार्य  

·         अपने काम लगाया गया समय

·         इनफार्मेशन कम्युनिकेशन तकनीक का इस्तेमाल 

शुरू से हम बाल केन्द्रित प्रशिक्षण की बात करते रहे है पर वास्तविकता में बच्चो के सीखने को लेकरे आज तक हम संजीदा नहीं हो पाए है । प्रशिक्षण के कारन हम शब्द बहुत सीखे हैं पर जमीन पर उनको उतर नहीं पाए है । ज्यादातर बार हम बाल केन्द्रित नहीं हो पाते है और जब होते हैं भी तो अधिगम बहार आजाता है और बच्चों के मन लगने पर ज्यादा फोकस करने लगते है
वत्र्तमान में समार्ट फोने का प्रचलन  बी बढ़ा है । 33प्रतिशत विद्यालयों में कंप्यूटर आ गए है । अनेक शिक्षकों के घर में किसी न किसी रूप में कंप्यूटर है । गाँव पंचायत स्तर पर वसुधा केंद्र हैं । ये जो संवाद के अवसर बढे है और जी इनकी वैश्विक पहुँच बनी है। संचार के ये माध्यम हमारे जीवन का अभिन्न अंग बन गए हैं । लोग सोशल साइट्स के माध्यम से अपने विचारों को एक दुसरे तक पहुंचा रहे है।

ये प्रशिक्षण बच्चों के सीखने के सम्बन्ध में है | बच्चों का प्रभावी रूप से शिक्षण कैसे हो? यही इस प्रशिक्षण का विषयवस्तु है |   

 


तालिका 1 ऑनलाइन प्रशिक्षा का स्वरुप

ऑनलाइन कोर्से का स्वरुप

सप्ताह

विषय वस्तु

पहला सप्ताह

बच्चों के सीखने से जुड़े मुद्दे

बच्चों के नहीं सीखने का असर विभिन्न क्षेत्रों में कैसा होगा

समाज क्या चाहता है

बच्चों के सीखने को लेकर कहा कहाँ और क्या क्या   परिवर्तन किया जाय

दूसरा सप्ताह

बच्चों के घर परिवार में परिवर्तन कैसे 

बच्चों की विद्यालय / कक्षा की तैयारी के सम्बन्ध में परिवर्तन कैसे

बच्चों का सीखने की क्षमताओं की समझ एवं इस आधार पर कक्षा में परिवर्तन कैसे

     बच्चों के सिखाने को लेकर शिक्षाशास्त्र में  परिवर्तन  कैसे

तीसरा सप्ताह

बच्चों के सीखने को लेकर शिक्षकों से अपेक्षाओं  एवं भूमिका की समझ में परिवर्तन कैसे

बच्चों के सीखने को लेकर शिक्षक की मानसिकता में परिवर्तन कैसे

शिक्षको की विषय के समझ में परिवर्तन कैसे

शिक्षकों के द्वारा पाठ्य पुस्तक तथा अन्य सामग्री का इस्तेमाल कैसे करें

चौथा सप्ताह

प्रभावी रूप से सीखने के लिए चिंतनशील शिक्षण कैसे

चिंतनशील शिक्षण  में प्रक्रिया / विधि  कैसे

चिंतनशील शिक्षण में उन्नत वर्ग व्यवस्था कैसे

चिंतनशील शिक्षण में मूल्याङ्कन एवं सपोर्ट कैसे

पांचवा सप्ताह

शिक्षा तंत्र में परिवर्तन कैसे

प्रभावी शिक्षण से होने वाले फायदे को समझ कर बच्चों के प्रभावी शिक्षण के लिए प्रयास करेंगे

प्रभावी शिक्षण सुनिश्चित करने के बाद बदलाव के सूचक

    प्रभावी शिक्षण के लिए मेरी योजना कैसी हो   

 

आकृत 1 प्रशिक्षण का बहाव

 



Building Learning Science-Based Courseware:

  • Team formation and project planning
  • User roles and permission setup
  • Developing effective outcomes models: designing for data
  • Using learning science in courseware design
  • Formative assessment integration
  • Using Acrobatiq-developed courses with an LMS
  • Collecting and analyzing student feedback from within an Acrobatiq course
  • Accessibility compliance requirements

Summary of the course

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The Professional Learning Communities model flows from the assumption that the core mission of formal education is not simply to ensure that students are taught but to ensure that they learn. A Professional Learning Community (PLC) is a group of educators who meet regularly to share their expertise and work collaboratively to improve teaching skills and the academic performance of the students.

Most leadership programmes for school leaders pay significant attention to the role of the head teacher in leading and managing change. High expectations of student achievement need to be reflected in explicit standards that have been benchmarked against those of other schools and school systems to ensure that they reflect best practice . Standards and associated targets constitute the starting point for redesigning how schools operate, so that meeting the standards come first in everything that schools do.

This course on classroom management aims to provide teachers an understanding of what is classroom management and importance of Classroom Management in enhancing academic outcomes for students from culturally diverse background. The aim of the course is derived from the identified core competencies that teachers should have with respect to Classroom Management.

The term Classroom Management refers to the strategies and resulting procedures and instructional strategies that teacher implements to create a conducive and positive classroom environment. It is amalgam of activities that act as catalyst to positively manage student behaviour and induce effective learning. It stretches from simple yet compelling indicator, such as the arrangement of seating in classroom (vertical rows versus group seating, rolling seating arrangement etc.) to more complex, multi-layered indicators, such as instructional strategy (uniform or differentiated instruction for different students).

The aim to have efficient classroom management at secondary and higher secondary level of education also relates to sustainability in education; importance of high order thinking and continuous professional development, are critical to sustainability in secondary education.

Aim of the course

The course presents proposed strategies and activities that teachers can practice to deal with various aspects of Classroom Management. The module on classroom management intends to:

  • Enable teachers to understand the importance of classroom management and its associated components

  • Provide teachers with an understanding of barriers to student learning

  • Guide teachers to reflect on their student engagement practices;

  • Help teachers in reflecting upon effective ground rules for classroom management

  • Guide teachers to reflect upon how to manage discipline in the classroom